हंसी की फुलझड़ियां और ठहाकों के धमाके

अतार्किक फिल्मों को तार्किक रूप से बनाकर कनविक्शन लाना दुनिया का सबसे मुश्किल सिनेमा होता है। चलती कहानी में किसी भी दृश्य में कहीं का भी संवाद जोड़कर हास्य पैदा करने में माद्दा लगता है। सटीक लेखनी और अति कुशल स्क्रीनप्ले सफल हास्य फिल्मों के लिए जरूरी होता है। निर्देशक फरहाद सामजी हाउसफुल 4 में इस प्रयास में पूरी तरह से सफल रहे हैं!

पहली तीन हाउसफुल फ़िल्मों के मुकाबले हाउसफुल 4 बड़े पैमाने पर बनाई गई फिल्म है। यह कहानी है 3 भाइयों अक्षय, रितेश और बॉबी देओल की, जो लंदन में एक सलून चलाते हैं। एक डॉन के पैसे अपने भुलक्कड़पन के चलते वाशिंग मशीन में डाल देते हैं। अब माइकल भाई के पैसे चुकाने के लिए यह प्लान बनाते हैं, अमीर लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाने का और उसके बाद क्या-क्या होता है, इसी ताने-बाने पर बुनी गई है फिल्म हाउसफुल 4।

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