बिहार में पीडीएस का हाल, मांगा अनाज, मिली जेल

बीती 7 जून को बिहार के अरवल के अनुमंडल कार्यालय में राशन कार्ड बनाने और उसका सत्यापन करवाने के लिए भीड़ उमड़ी थी.
हज़ारों की इस भीड़ के लिए सरकारी ‘सोशल डिस्टैंसिंग’ की बात बेमानी थी. राशन कार्ड के लिए लाइन में सबा परवीन भी खड़ी थी.
इस कोरोना कॉल में उनके लिए सरकारी खाद्यान्न सहायता अब जीने-मरने का सवाल बन चुकी है.
जीने-मरने का ये सवाल सिर्फ़ अरवल जिले के लोगों के लिए ही नहीं है. बल्कि बिहार की एक बड़ी आबादी के लिए ये सवाल अहम है.
इतना अहम कि अब लोग इसके लिए जेल भी जा रहे है.

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