नेपाल-चीन सीमा विवाद: क्या नेपाल भारत की तरह चीन के ख़िलाफ़ भी सख़्त रवैया अपनाएगा?

नेपाल की सरकार के ऊपर इस बात का दबाव बढ़ रहा है कि वो चीन के साथ सीमा के मुद्दों को लेकर वैसा ही रुख़ अख़्तियार करे जैसा कि भारत के साथ अपनाया है. नेपाल और भारत की मीडिया में आई कई रिपोर्टों में यह कहा गया है कि “कई नेपाली गांव चीन के क्षेत्र में आते हैं.”
अभी मुश्किल से एक हफ़्ते पहले ही नेपाल में नए राजनीतिक नक़्शे के आधार पर नए प्रतीक को आधिकारिक रूप से अपनाया गया था. इस नए नक़्शे में 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक़ लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को जगह दी गई थी. ये क्षेत्र पहले से भारत के नक़्शे में शामिल रहे हैं और फ़िलहाल इन पर भारत का क़ब्ज़ा है.
लेकिन नेपाल की सरकार ने चीन और नेपाल सीमा मुद्दे पर अब तक अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है. उत्तरी गोरखा में रुई गांव और उत्तरी संखुवासभा में च्यांग और लुंगडेक गांव कथित तौर पर 1960 के दशक से चीन के क़ब्ज़े में हैं.
लेकिन बीबीसी हिंदी से बातचीत में भूमि प्रबंधन मंत्री पद्मा कुमारी आर्यल (सीमा मुद्दों के लिए भी तकनीकी तौर पर इनकी ही ज़िम्मेदारी बनती है) बताती हैं कि नेपाल-चीन के बीच सीमा संबंधी ज़्यादातर मुद्दों को सुलझा लिया गया है लेकिन “अगर कोई नया मुद्दा आता है तो इसे कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए सुलझाया जाएगा.”

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