विकास दुबे ‘मुठभेड़’ या हैदराबाद ‘एनकाउंटर’: सड़क पर इंसाफ़, जश्न और वही सवाल

उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में विकास दुबे की मौत ने हैदराबाद पुलिस के उस एनकाउंटर की याद दिला दी है जिसमें एक वेटरिनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप मामले में सभी चार अभियुक्तों को मार दिया गया था.
हालांकि ये दोनों अलग-अलग घटनाएं हैं लेकिन क़ानून के जानकारों का कहना है कि दोनों ही मामलों में क़ानून के शासन को ताक पर रख दिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस (रिटायर्ड) गोपाल गौड़ा का कहना है, “पुलिस लॉकअप में कोई भी मौत (जैसा कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन में हुआ था) हो या मुठभेड़ में, ये क़ानून के शासन का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है. किसी को भी चाहे वो पुलिस ही क्यों न हो, क़ानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए.”
तकरीबन आठ महीने पहले, शमशाबाद के पास एक नौजवान वेटरिनरी डॉक्टर की गैंगरेप के अगले दिन ही साइबराबाद पुलिस ने दो ट्रक ड्राइवरों और उनके दो हेल्परों को गिरफ़्तार किया था.
गिरफ़्तार किए गए चारों लोगों पर उस महिला की गैंग रेप का आरोप लगाया गया था.

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